7 अप्रैल 2023 - 17:48
ईरान की तरक़्क़ी से चिंतित होकर अमेरिका समझौता करने को हुआ तैयार।

वाशिंगटन से जो संकेत मिल रहे हैं उनसे लगता है कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपना रवैया बदल लिया है। वह ईरान की ओर से पिछले दो साल में इस फील्ड में की गई तरक़्क़ी से बेहद चिंतित है।

अमेरिका ने ईरान से निकट भविष्य में समझौता करने का इशारा देते हुए इस्राईल के वरिष्ठ अधिकारीयों को इस बारे में खबर दी है। इस्राईल की वाल्ला न्यूज़ एजेंसी ने खबर देते हुए कहा कि अमेरिका ईरान के साथ आंशिक परमाणु समझौते पर दस्तखत कर सकता है और वाशिंगटन ने ईरान के सामने प्रस्ताव पेश कर दिया है लेकिन अभी तक तेहरान की ओर से अमेरिका की शर्तों पर कोई जवाब नहीं मिला है। 

इस रिपोर्ट के मुताबिक़ व्हाइट हाउस ने तल अवीव में अपने घटकों को साफ़ सन्देश देते हुए कहा कि अमेरिका ईरान की ओर से परमाणु कार्यक्रम की कुछ एक्टिविटीज़ को रोकने के बदले तेहरान पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को हटाने के लिए तैयार है। तल अवीव के कई सीनियर ऑफिसर्स ने इन खबरों की पुष्टि करते हुए कहा कि है कि अमेरिका और ईरान के बीच ऐसे समझौते की संभावना है। 

वाल्ला न्यूज़ एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में दावा करते हुए कहा है कि ईरान को अमेरिका की ओर से इस समझौते की पेशकश और उसकी तफ्सील मिल गयी है लेकिन तेहरान को अमेरिका को शर्ते क़ुबूल नहीं हैं। 

वाशिंगटन से जो संकेत मिल रहे हैं उनसे लगता है कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपना रवैया बदल लिया है। वह ईरान की ओर से पिछले दो साल में इस फील्ड में की गई तरक़्क़ी से बेहद चिंतित है। 

बता दें कि हाल ही में अमेरिक न्यूज़ एजेंसी एक्सियस ने भी खबर देते हुए कहा था कि बाइडन प्रशासन ईरान पर लगी पाबंदियों में ढील देने के लिए तैयार है लेकिन उसके लिए ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम में थोड़ा बदलाव लाना होगा और कुछ एक्टिविटीज़ को बंद करना होगा। इस संबंध में पिछले लगभग तीन महीने से होने वाले बातचीत के आधार पर ईरान को अपना 60% यूरेनियम एनरिच्मेंट कार्यक्रम रोकना होगा।  

पश्चिमी जगत दावा करता रहा है कि ईरान के पास फिलहाल 60% यूरेनियम एनरिच्मेंट का 87 किलो से अधिक का ज़खीरा है ज़रा सा यूरेनियम संवर्धन और हो तो यह कम से कम एक परमाणु बम बनाने के लिए काफी है। और ईरान के परमाणु कर्यक्रम के बारे में इसी बात ने अमेरिका और पश्चिमी जगत को डरा दिया है। 

इस रिपोर्ट के आधार पर कहा जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच यह संभावित समझौता बिलकुल वैसा ही होगा जैसा 2013 में ओबामा प्रशासन और ईरान के बीच हुआ था लेकिन ईरान ने अभी तक अमेरिका के इस प्रस्ताव पर मंज़ूरी नहीं दी है तेहरान JCPOA पर ही ज़ोर दे रहा है और उसके अलावा किसी समझौते पर राज़ी नहीं है। 

ग़ौर तलब है कि यूरोपीय पक्ष के इस समझौते के बार बार उल्लंघन और 2018 में अमेरिका के एक तरफा रूप से इस समझौते से निकलने के बाद भी अमेरिकी विदेश मंत्री ईरान पर आरोप लगाते हुए कहते रहे हैं कि ईरान परमाणु वार्ता को लेकर गंभीर नहीं है। ब्लिंकेन ने ईरान पर बेबुनियाद आरोप लगाते हुए कहा कि हम अतीत में जब जब भी इस समझौते में पलटने के लिए गंभीर थे ईरान ने यूरोप की पेशकश को ठुकरा दिया। अब JCPOA हमारी प्राथमिकता नहीं है, हाँ हम इस बात को लेकर अटल हैं कि ईरान को परमाणु बम नहीं बनाने देंगे साथ ही इस मक़सद तक पहुँचने के लिए डिप्लोमेसी सबसे प्रभावी रास्ता है।